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पुरानी सर्दी, खाँसी, दमा का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार श्वसन रोगों का स्थायी समाधान। प्राकृतिक उपचार, सुरक्षित और प्रभावी।

परामर्श के लिए कॉल करें: 8979413938

महत्वपूर्ण नोट: उपरोक्त सभी निर्देश आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार हैं। किसी भी उपचार को आरम्भ करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

सावधानी: यदि लक्षण गंभीर हैं या खून अधिक मात्रा में आ रहा है, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

सर्वप्रार्थना

हे ईश्वर, सभी को अच्छी बुद्धि दो, आरोग्य दो, सभी को सुख-आनंद-ऐश्वर्य में रखो, सबका भला करो, कल्याण करो, रक्षा करो और तेरा मधुर नाम मुख में अखंड रहने दो।

Saturday, January 3, 2026

नेत्रतर्पण प्रक्रिया - डॉ. रमित कुमार

नेत्रतर्पण प्रक्रिया - डॉ. रमित कुमार

नेत्रतर्पण प्रक्रिया (Netratarpan Procedure)

डॉ. रमित कुमार की आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति

संपर्क: मोबाइल नंबर - 8979413938

नेत्रतर्पण किट सामग्री

क्र.सं. नेत्रतर्पण किट मात्रा जाँच सूची (✅)
1 नेत्रतर्पण गॉगल 1
2 उड़द पीठ (चूर्ण) 8 पैकेट
3 तर्पण घृत 1 पैकेट
4 5 सीसी सीरिंज 1
5 नेत्रधावन भरद (औषधि) 8 पैकेट
6 आई पैड 8 जोड़े
7 प्लास्टिक दस्ताने 8 पैकेट

तैयारी

  1. कर्म से पहले थोड़े समय पहले तेल आदि का उपयोग न करके आँखें साफ कर लें।
  2. तर्पण घृत बोतल में या भांडे में गर्म करके लें।
  3. नेत्रबस्ति के लिए बस्ति द्रव्य गर्म करने के लिए गैस पर कढ़ाई में पानी रखें।
  4. त्रिफला जल निर्माण विधि: पिसी हुई औषधि द्रव्य 25 ग्राम भरकर लेकर उसमें 400 मिली पानी डालकर उसका 1/4 गर्म करके 100 मिली किल्लत (या छान) रखें। यह गर्म करके लें।

रोगी तैयारी

  1. रोगी को पीठ के बल लिटाकर सुविधाजनक स्थिति में व्यवस्थित कर लें।
  2. दिया हुआ स्टीकिंग गॉगल लेकर उसके बजाय तेल बाहर न आए इस पद्धति से लगाई हुई कणीक (आटे की लोई) लगाएँ।

क्रिया (प्रक्रिया)

चरण 1: सीरिंज से गुनगुना तर्पण घृत भरकर लें।

चरण 2: व्यवस्थित आँखें बंद करके उसमें सीरिंज से तर्पण घृत छोड़ें।

चरण 3: सामान्यतः एक बजू (आँख) में 15 मिली द्रव्य छोड़ें।

चरण 4: पक्ष्माग्र (पलकों के किनारे) तक डूब जाने तक स्नेह (घृत) लें। स्नेह सुखोष्ण (हल्का गर्म) होना चाहिए।

चरण 5: दोनों बजुओं में द्रव्य छोड़ने के बाद रोगी को आँखों की उघड़-झपक (खोलना-बंद करना) करने के लिए कहें।

चरण 6: कर्म की अवधि सामान्यतः 10 से 12 मिनट या वैद्य की सूचना अनुसार रखें।

चरण 7: कर्म की अवधि समाप्त होने के बाद सीरिंज से बस्ति द्रव्य खींच कर लें।

चरण 8: कर्म के बीच रोगी को कोई तकलीफ न हो इसकी खात्री कर लें। कर्म के बीच शांत रखें।

ध्यान दें: यह प्रक्रिया केवल प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा ही की जानी चाहिए। घर पर इस प्रक्रिया को करने का प्रयास न करें।

शेष कार्य

  1. कर्म होने के बाद गॉगल निकालें/नेत्रबस्ति यंत्र और लगाई हुई कणीक निकाल कर लें, नेत्र साफ कर लें।
  2. त्रिफला जल से नेत्रधावन करें और फिर दिए हुए कॉटन से पोंछ लें।