नेत्रतर्पण किट सामग्री
| क्र.सं. |
नेत्रतर्पण किट |
मात्रा |
जाँच सूची (✅) |
| 1 |
नेत्रतर्पण गॉगल |
1 |
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| 2 |
उड़द पीठ (चूर्ण) |
8 पैकेट |
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| 3 |
तर्पण घृत |
1 पैकेट |
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| 4 |
5 सीसी सीरिंज |
1 |
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| 5 |
नेत्रधावन भरद (औषधि) |
8 पैकेट |
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| 6 |
आई पैड |
8 जोड़े |
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| 7 |
प्लास्टिक दस्ताने |
8 पैकेट |
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तैयारी
- कर्म से पहले थोड़े समय पहले तेल आदि का उपयोग न करके आँखें साफ कर लें।
- तर्पण घृत बोतल में या भांडे में गर्म करके लें।
- नेत्रबस्ति के लिए बस्ति द्रव्य गर्म करने के लिए गैस पर कढ़ाई में पानी रखें।
- त्रिफला जल निर्माण विधि: पिसी हुई औषधि द्रव्य 25 ग्राम भरकर लेकर उसमें 400 मिली पानी डालकर उसका 1/4 गर्म करके 100 मिली किल्लत (या छान) रखें। यह गर्म करके लें।
रोगी तैयारी
- रोगी को पीठ के बल लिटाकर सुविधाजनक स्थिति में व्यवस्थित कर लें।
- दिया हुआ स्टीकिंग गॉगल लेकर उसके बजाय तेल बाहर न आए इस पद्धति से लगाई हुई कणीक (आटे की लोई) लगाएँ।
क्रिया (प्रक्रिया)
चरण 1: सीरिंज से गुनगुना तर्पण घृत भरकर लें।
चरण 2: व्यवस्थित आँखें बंद करके उसमें सीरिंज से तर्पण घृत छोड़ें।
चरण 3: सामान्यतः एक बजू (आँख) में 15 मिली द्रव्य छोड़ें।
चरण 4: पक्ष्माग्र (पलकों के किनारे) तक डूब जाने तक स्नेह (घृत) लें। स्नेह सुखोष्ण (हल्का गर्म) होना चाहिए।
चरण 5: दोनों बजुओं में द्रव्य छोड़ने के बाद रोगी को आँखों की उघड़-झपक (खोलना-बंद करना) करने के लिए कहें।
चरण 6: कर्म की अवधि सामान्यतः 10 से 12 मिनट या वैद्य की सूचना अनुसार रखें।
चरण 7: कर्म की अवधि समाप्त होने के बाद सीरिंज से बस्ति द्रव्य खींच कर लें।
चरण 8: कर्म के बीच रोगी को कोई तकलीफ न हो इसकी खात्री कर लें। कर्म के बीच शांत रखें।
ध्यान दें: यह प्रक्रिया केवल प्रशिक्षित आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा ही की जानी चाहिए। घर पर इस प्रक्रिया को करने का प्रयास न करें।
शेष कार्य
- कर्म होने के बाद गॉगल निकालें/नेत्रबस्ति यंत्र और लगाई हुई कणीक निकाल कर लें, नेत्र साफ कर लें।
- त्रिफला जल से नेत्रधावन करें और फिर दिए हुए कॉटन से पोंछ लें।