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पुरानी सर्दी, खाँसी, दमा का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार श्वसन रोगों का स्थायी समाधान। प्राकृतिक उपचार, सुरक्षित और प्रभावी।

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महत्वपूर्ण नोट: उपरोक्त सभी निर्देश आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार हैं। किसी भी उपचार को आरम्भ करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

सावधानी: यदि लक्षण गंभीर हैं या खून अधिक मात्रा में आ रहा है, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

सर्वप्रार्थना

हे ईश्वर, सभी को अच्छी बुद्धि दो, आरोग्य दो, सभी को सुख-आनंद-ऐश्वर्य में रखो, सबका भला करो, कल्याण करो, रक्षा करो और तेरा मधुर नाम मुख में अखंड रहने दो।

Saturday, January 3, 2026

छोटे बच्चों का पथ्य पेपर - आयुर्वेदिक आहार निर्देश

छोटे बच्चों का पथ्य पेपर - आयुर्वेदिक आहार निर्देश

डॉ. रमित कुमार आयुर्वेदिक चिकित्सालय

आयुर्वेदिक परामर्श एवं उपचार केंद्र

संपर्क: 8979413938

छोटे बच्चों का पथ्य पेपर (आहार एवं दिनचर्या निर्देश)

सुबह उठने के बाद:

किसी भी फल या सब्जी का पराठा घी या मक्खन लगाकर।

थोड़ी देर बाद भूख लगने पर / साँत्वना के लिए: एक कप सिर्फ दूध।

स्कूल के लिए डिब्बा:

सब्जी-रोटी एक चम्मच घी।

सब्जियाँ (इनमें से कोई भी):
  • दुधिया भोपला (लौकी), लाल भोपला, तुरई, करेला, परवल, तोंडली, पालक, घोंघा (स्नेल)
  • सहजन की फलियाँ, राजमा, चावल की दाल, माठ (मोठ), मूंग दाल, सफेद बैंगन
  • नवलकोल (?), फूलगोभी, कोहलू (?) केला फूल, प्याज के पत्ते, धनिया
  • घोल (?) ग्वार फली, कोहलू (?), मूली, गाजर, खीरा, चुकंदर
ध्यान रखें:

तेल: सरसों या तिल का। नमक: सेंधा नमक ही। मीठा: सेंद्रिय गुड़ ही। घी: देसी गाय का ही।

स्कूल से आने के बाद:

भूख लगने पर: मूंग की दाल-चावल पतीले में पकाकर, एक चम्मच घी।

शाम: 5 बजे:

फल, सलाद, मुरमुरे, काले चने, मुनक्का, खजूर, अंजीर, मूंग के लड्डू, पौष्टिक लड्डू, कड़क (?) लड्डू, अहलाद (?), खीर इत्यादि।

नोट:

केला और सेब नहीं दें।

रात: 6 से 8 बजे:

सब्जी (ऊपर बताई गई फल-सब्जियाँ), भाकरी (ज्वार की)।

थोड़ी देर बाद भूख लगने पर / साँत्वना के लिए: सोते समय एक कप दूध।

भोजन करने के नियम:

  • 1 ग्रास 32 बार चबाकर खाएँ, हर ग्रास के साथ एक घूँट पानी।
  • खाने से 1 घंटे पहले और खाने के 1 घंटे बाद पानी न पिएँ।
  • प्यास लगने पर एक घूँट पानी।
  • खाते समय शांत चित्त से, भोजन की निंदा न करते हुए, जल्दबाजी या हड़बड़ी न करते हुए, थोड़ी सी भूख रखकर भोजन करें।
  • गपशप करते, टीवी देखते, फोन पर बात करते हुए भोजन न करें।

मांसाहार:

  • 15 दिन में 1 बार मटन या देसी मुर्गी।
  • अंडे या केवल उबली हुई मछली खाएँ।
  • सूप (धनिया, जीरे, साजूक (?) घी की तड़क लगाकर) दें।

व्यायाम (शारीरिक):

  • पूरे शरीर को तेल से मालिश करें।
  • पाचन शक्ति सुधारने और ताकत बढ़ाने के लिए, पसीना आने तक व्यायाम करें।
  • सूर्य नमस्कार, संध्यावंदन, कसरत, योगासन। कराटे।

व्यायाम के बाद नहाने में साबुन की जगह उबटन का प्रयोग करें।

व्यायाम (मानसिक):

  • ॐकार का 21 बार जाप।
  • ध्यान (मेडिटेशन) - आँखें बंद करके 10 मिनट शांत बैठना।

सर्वप्रार्थना:

हे ईश्वर, सभी को अच्छी बुद्धि दो, आरोग्य दो, सभी को सुख, आनंद, ऐश्वर्य में रखो, सबका भला करो, कल्याण करो, रक्षा करो और तेरा मधुर नाम मुख में अखंड रहने दो।

नींद: रात 10.30 से सुबह 6:

  • जल्दी सोना और उठना।
  • सोने से 2 घंटे पहले और उठने के 2 घंटे बाद तक टीवी, मोबाइल, अखबार न देखें।
  • सुबह उठने पर और रात को सोते समय दाँत साफ करने के लिए आयुर्वेदिक दंतमंजन का प्रयोग करें।

सुवर्णप्राश:

शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए: सुवर्णप्राश हर महीने पुष्य नक्षत्र में दें।

टालना चाहिए (परहेज):

  • कफ की तकलीफ, अपच होने पर दूध न लें।
  • दही, छाछ, पनीर, कढ़ी न लें।
  • प्रोटीन पाउडर, चॉकलेट (चोको?), कुरकुरे, केक, बिस्कुट, चॉकलेट, सैंडविच, पिज्जा, बाजार की चाइनीज, गन्ने का रस, बर्फ, आइसक्रीम, खट्टे पदार्थ, बाहर का खाना, खुले में बने पिठले (?), सेव (नूडल्स?), फरसाण (नमकीन), शेंगदाने (मूंगफली)।
  • सब्जी में बेसन न लगाएँ।
नाश्ते में न लें:

ओट्स, कॉर्नफ्लेक्स, उपमा, पोहा, चाय-चपाती, दूध-चपाती, दूध-भात, चाय-बिस्कुट, चाय और नमकीन, और बेकरी के पदार्थ, दूध और बोर्नविटा, कॉमल (? शेक?), शिकरंज (?) मैगी, इडली, डोसा, ढोकला (इंस्टेंट बने हुए भी), समोसा, वड़ा, भजिया, भेल, कमसल (?), सॉस, जैम न लें।