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पुरानी सर्दी, खाँसी, दमा का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार श्वसन रोगों का स्थायी समाधान। प्राकृतिक उपचार, सुरक्षित और प्रभावी।

परामर्श के लिए कॉल करें: 8979413938

महत्वपूर्ण नोट: उपरोक्त सभी निर्देश आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार हैं। किसी भी उपचार को आरम्भ करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

सावधानी: यदि लक्षण गंभीर हैं या खून अधिक मात्रा में आ रहा है, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

सर्वप्रार्थना

हे ईश्वर, सभी को अच्छी बुद्धि दो, आरोग्य दो, सभी को सुख-आनंद-ऐश्वर्य में रखो, सबका भला करो, कल्याण करो, रक्षा करो और तेरा मधुर नाम मुख में अखंड रहने दो।

Saturday, January 3, 2026

वमन उपचार जानकारी - डॉ. रमित कुमार

वमन उपचार जानकारी - डॉ. रमित कुमार (16:9)
आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र
डॉ. रमित कुमार
संपर्क: 8979413938

वमन (Therapeutic Emesis)

वमन का अर्थ है औषधीय द्रव्य देकर उल्टी करवाना।

अनुमानित कोर्स
से
तक
पंचकर्म की समय :- सुबह/ शाम
से
बजे
पंचकर्म प्रकार :- स्नेहन स्वेदन वमन
पंचकर्म शुल्क
महत्वपूर्ण नोट:

रोगी को पंचकर्म शुरू करने से पहले बरतनी चाहिए सावधानियाँ: (डिस्पोजेबल कपड़े चाहिए हो तो उनके अलग शुल्क लगेंगे।)

पंचकर्म से पहले की सावधानियाँ

  1. पंचकर्म उपचार का एक हिस्सा है और इससे शरीर शुद्धि होकर रोग की जड़ का उच्छेदन होने में सहायता मिलती है। रोग पूरी तरह ठीक होने के लिए पंचकर्म चलते समय और पंचकर्म के बाद डॉक्टर की सलाह से औषधि उपचार करना आवश्यक है।
  2. क्या आपने अपना समय और पंचकर्म का स्वरूप समझ कर लिया है? जितना कोर्स निर्धारित है क्या आप उतने समय और उतने दिन में पूरा कर सकते हैं? क्या आपके पास समय है? क्या उतना शुल्क भर सकते हैं? इसकी पूरी पुष्टि कर लें।
  3. पंचकर्म शुल्क कोर्स की नामांकन प्रक्रिया में पूरा भर दें। कोई भी शंका हो तो संबंधित डॉक्टर से संपर्क करें।
  4. महिलाओं के लिए पंचकर्म शुरू करने से पहले यदि आगामी मासिक धर्म की तारीख आती है तो ऐसी जानकारी डॉक्टर को दें।
  5. पंचकर्म चलते समय लेप, जलौका (जोंक) चिकित्सा, रक्तमोक्षण, अग्निकर्म (दहन) करवाना पड़े तो उनके अलग शुल्क लगेंगे।
  6. पंचकर्म करवाने से पहले ई.सी.जी. (ईसीजी) करवाना अनिवार्य रहेगा और उसका शुल्क अलग लगेगा।

पंचकर्म के लिए आते समय बरतनी चाहिए सावधानियाँ

  1. निर्धारित समय से १५ मिनट पहले आएँ। पंचकर्म के दिन कैप्सूल (गोली) न लें। किसी कारणवश कैप्सूल लेना हो तो डॉक्टर को उसकी जानकारी पहले दिन ही दे दें, ताकि समय का अपव्यय न हो। साथ में तौलिया और बदलने के कपड़े, स्वेटर, कानटोपी, स्कार्फ आदि लाएँ। पंचकर्म के बाद हवा में न घूमें, इससे वात बढ़ता है।
  2. पंचकर्म के बाद का भोजन हल्का रखें। पानी गुनगुना या उबालकर ठंडा किया हुआ पिएँ।
  3. पंचकर्म के बाद शरीर शुद्धि हो रही होती है, इसलिए नियमों का कड़ाई से पालन करें।
  4. स्टीम बाथ में जाने से पहले जरूरत हो तो १ कप गर्म पानी लें। ऐसी हिदायत नर्स या अटेंडेंट से लें।
  5. शारीरिक संबंध, हवा में घूमना, अपथ्यकर आहार, बाहर का खाना, ठंडा पानी, चिड़चिड़ापन, रात को जागना, दिन में सोना टालें। नाश्ता न करें। चाय-चपाती, चाय-बिस्कुट, पोहा, उपमा, चाय-बेकरी पदार्थ, दूध-चपाती, शक्कर, दूध व फल, अचार, पापड़, दही, दूध, छाछ, हरी मिर्च, साबुदाना, खट्टी दाल टालें।
  6. कीमती वस्तुएँ, मोबाइल, पर्स अपनी जिम्मेदारी पर लाएँ।
  7. कभी तकलीफ हो तो डॉक्टर को तुरंत फोन करें (8979413938)।

वमन विधि

ध्यान दें:

५ दिन औषधीय घी लेना चढ़ते क्रम में, जरूरत हो तो अधिक दिन लग सकते हैं, उनके अलग शुल्क लगेंगे। पंचकर्म शुरू करने से पहले वाली रात को रोगी को भात या हल्का आहार लेना आवश्यक है।

वमन उपचार कार्यक्रम
दिन घी (मात्रा) अनुशंसित आहार
पहला दिन घी खाली
दूसरा दिन घी खाली
तीसरा दिन घी खाली
चौथा दिन घी खाली
पाँचवाँ दिन घी खाली
छठवाँ दिन घी-भात घी के साथ भात
सातवाँ दिन वमन वमन प्रक्रिया
  1. सुबह घी लेने के बाद दूध की चाय या गुनगुने पानी से लें। घी लेने के बाद धीरे-धीरे भूख कम होती जाती है। सुबह घी लेने के बाद घी का उचित मात्रा में पाचन हुआ है या नहीं इसके लिए गुनगुना पानी पिएँ। घी की डकार आए तो घी का पाचन नहीं हुआ है ऐसा समझें और गुनगुना पानी लेते रहें। मध्यम डकार आए और भूख लगे तो रोगी को भात खाना चाहिए। रात को सब्जी-भाकरी लें। भूख न लगने पर भोजन न करें। घी लेते समय जी मचलना या उल्टी हो तो इलायची, खड़ी सौंफ चबाएँ। पेट साफ न हो तो घी न लें।
  2. घी चलते समय शाम को मालिश और स्टीम बाथ करवानी पड़ती है।
  3. मालिश के बाद यथासंभव शरीर पर साबुन न लगाएँ। तेल को सोखने दें।
  4. ५वें दिन शाम को आपका उचित मात्रा में स्नेहन हुआ है या नहीं, इसके लिए डॉक्टर से मिलें।
  5. ६वें दिन शाम को भोजन में दही-भात, उड़द की आँटी, बरफी (मिठाई), श्रीखंड, रबड़ी आदि कफ बढ़ाने वाला आहार लें। इससे वमन अच्छा होता है।
  6. ७वें दिन सुबह १ गिलास दूध पीकर आएँ। फिर पुनः मालिश-स्टीम करवाकर रोगी को वमन के लिए चाटनी दी जाती है। उसके बाद आसानी से वमन होता है।
  7. वमन के बाद रोगी को घर जाकर थोड़ा आराम करना चाहिए। भूख लगे तो गुनगुना पानी, काले चने लें। रात को ऊपर बताए प्रकार से आहार लें।

वमन के बाद लेने वाला आहार

दिन सुबह शाम
पहला पतला पेज (तरल दलिया) पतला पेज
दूसरा पतला पेज पतला पेज
तीसरा गाढ़ा पेज गाढ़ा पेज
चौथा गाढ़ा पेज बिना तड़के की मूंग की खिचड़ी
पाँचवाँ तड़के वाली मूंग की खिचड़ी तड़के वाली मूंग की खिचड़ी
छठवाँ बिना तड़के का चिकन सूप या वरा भात तड़के वाली मूंग की खिचड़ी या वरा भात
सातवाँ तड़के वाली मूंग की खिचड़ी या वरा भात सब्जी चपाती या वरा भात

आहार विधि:

पतला पेज: आधा वाटी चावल हल्का भून कर लें, फिर मिक्सर में पीस लें, फिर उसमें ४ वाटी पानी डालकर पकाएँ। स्वाद के लिए थोड़ा नमक डालें।

गाढ़ा पेज: ऊपर बताए प्रकार से चावल लें, उसमें १ वाटी पानी डालकर पकाएँ। स्वाद के लिए थोड़ा नमक डालें।

बिना तड़के की मूंग की खिचड़ी: मूंग की दाल ५० ग्राम और पानी ६०० मिली लेकर अच्छी तरह पकाएँ और भात के साथ खाएँ।

तड़के वाली मूंग की खिचड़ी: ऊपर बताए प्रकार से मूंग की दाल पकाकर उसमें घी, हींग, जीरा, मोहरी (सरसों) की तड़क दें, स्वाद के लिए नमक, काली मिर्च, कटी हुई धनिया डालें।

बिना तड़के का चिकन या मटन सूप: बकरे या मुर्गी का मांस ५० ग्राम और ६०० मिली पानी प्रेशर कुकर में पकाएँ। पकाते समय कटा प्याज, दालचीनी पाउडर, काली मिर्च डालें। फिर छानकर उसमें नमक और नीबू डालकर थोड़ी देर ढक कर रखें।

तड़के वाला चिकन सूप: ऊपर बताए प्रकार से घी में कपूर की तड़क दें।

नोट:

वमन के बाद फल लेना हो तो ३रे दिन से शुरू करें। वमन के बाद औषधियाँ डॉक्टर की सलाह से शुरू करें।

अंतिम सलाह:

उपरोक्त सभी निर्देशों का पालन करना आपके वमन उपचार की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसी भी प्रश्न या समस्या के लिए डॉ. रमित कुमार से सीधे संपर्क करें।