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पुरानी सर्दी, खाँसी, दमा का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार श्वसन रोगों का स्थायी समाधान। प्राकृतिक उपचार, सुरक्षित और प्रभावी।

परामर्श के लिए कॉल करें: 8979413938

महत्वपूर्ण नोट: उपरोक्त सभी निर्देश आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार हैं। किसी भी उपचार को आरम्भ करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

सावधानी: यदि लक्षण गंभीर हैं या खून अधिक मात्रा में आ रहा है, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

सर्वप्रार्थना

हे ईश्वर, सभी को अच्छी बुद्धि दो, आरोग्य दो, सभी को सुख-आनंद-ऐश्वर्य में रखो, सबका भला करो, कल्याण करो, रक्षा करो और तेरा मधुर नाम मुख में अखंड रहने दो।

Saturday, January 3, 2026

पोषण और पाचन उपचार - डॉ. रमित कुमार

पोषण और पाचन उपचार - डॉ. रमित कुमार

डॉ. रमित कुमार आयुर्वेदिक परामर्श

पोषण और पाचन उपचार (स्नेहपान और रूक्षण)
📞 संपर्क: 8979413938

वमन और विरेचन पंचकर्म से पहले स्नेहपान किया जाता है। स्नेहपान से लगभग 3 से 4 दिन पहले भोजन का सेवन रोक दिया जाता है, ताकि शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बने। उपचार की अवधि रोगी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

आहार संबंधी सुझाव

  1. आपको जितनी भूख लगे उसका 70 प्रतिशत ही खाना चाहिए, यदि भूख नहीं है तो न खाएँ।
  2. रूक्षण के दौरान आहार में तेल, घी, दूध, दही, पनीर या चिकने खाद्य पदार्थ बंद कर दें।
  3. ज्वार या बाजरे की भाकरी छाछ के साथ (छाछ ताज़ी बनी हो, फ्रिज की या रेडीमेड नहीं)।
  4. बिना मैदे का आटा और भाकरी, छाछ, बिना तेल की थालीपीठ (ज्वार के आटे की)।
  5. बिना तेल या घी की फुलके, सभी फल, सब्जियाँ और उबली हुई सब्जियाँ ही लें और बिना तड़के (फोड़णी) की सब्जियाँ।
  6. दुधिया भोपला (लौकी), शेवगा (ड्रमस्टिक), मेथी, सुरन (जिमिकंद), कद्दू (तुरई), करेला, चिचिंडा (परवल), तेंदली।
  7. बिना तड़के (फोड़णी) की सब्जी, चटनी, पंढरपुरी दाल, नमक, मिर्च, सलाद, चावल, बेसन।
  8. मूंग दाल का सूप, सब्जी का सूप चलेगा लेकिन बिना टमाटर या तड़के (फोड़णी) के।
  9. छाछ और ज्वार या छाछ और रागी, या मूंग, मसूर की दाल का पानी (रसेदार सब्जी)।
  10. सब्जियाँ और पराठा (आलू नहीं, तेल नहीं, घी नहीं) डालें, अजवाइन पाउडर, जीरा पाउडर डालें।
  11. पूरे दिन गर्म पानी पिएँ। 1 लीटर पानी में 1 चम्मच जीरा, 1 चम्मच धनिया पत्ती, आधा चम्मच जीरा डालकर इस पानी को उबालें और दिन भर घूँट-घूँट करके पिएँ, जरूरत हो तो ग्रीन टी लें।

दिनचर्या/सावधानियाँ:

  • धूप में न घूमें, दिन में न सोएँ। रात को जागें नहीं। संभोग से बचें। सिर्फ भूख लगने पर ही खाएँ।
  • मासिक धर्म के कम से कम आखिरी 3 दिन संरक्षित (सुरक्षित) रहने चाहिए, यदि उससे पहले किया है तो आपको डॉक्टर को सूचित करना चाहिए कि आपने संरक्षण किया है।

अन्य सूचनाएँ!

  • अन्य दवाएँ लेने में कोई समस्या नहीं है।
  • उपचार के दौरान यदि मल त्याग में कठिनाई हो तो चिकित्सक से परामर्श लें।
  • रूक्षण के दौरान यदि कोई स्टीम बाथ लेना चाहे तो शरीर को बिना तेल लगाए पसीना निकालना चाहिए। उद्वर्तन और निरूह बस्ती भी ऐसा करने से अच्छा परिणाम देती है।

अच्छे पाचन और रूक्षण के लक्षण:

  1. भूख का बेहतर एहसास।
  2. शरीर हल्का महसूस होता है।
  3. पेट साफ रहता है।
  4. भोजन का उचित पाचन होता है।