भाग 1

श्वसन रोगों का स्वरूप एवं उपचार

रोग ठीक करने के लिए आवश्यक गुण

पथ्य: आपके रोग को ठीक करने और शरीर की आवश्यकता के लिए।

नींद (रात 10.30 से सुबह 6)

व्यायाम (शारीरिक)

श्वसन व्यायाम (मानसिक)

सर्वप्रार्थना

हे ईश्वर, सभी को अच्छी बुद्धि दो, आरोग्य दो, सभी को सुख-आनंद-ऐश्वर्य में रखो, सबका भला करो, कल्याण करो, रक्षा करो और तेरा मधुर नाम मुख में अखंड रहने दो।

आहार समय सारणी

समय आहार
सुबह (7 से 10 बजे) सब्जी-रोटी (चपाती) एक चम्मच घी के साथ
दोपहर 1 बजे
(यदि भूख हो)
मूंग की दाल (हींग, गुड़, लहसुन, अदरक, हल्दी, आमचूर डालकर पतीले में पकाकर) चावल, घी
शाम 5 बजे
(यदि भूख हो)
फल, सलाद, मुरमुरे, काले चने, मुनक्का, खजूर, अंजीर, मूंग के लड्डू, पौष्टिक लड्डू, वड़ा, अहलाद इत्यादि। केला और सेब नहीं
रात 8 बजे तक सब्जी (ऊपर बताई गई फल-सब्जियाँ), भाकरी (ज्वार की)

आहार संबंधी महत्वपूर्ण निर्देश

मांसाहार संबंधी निर्देश: यदि मांसाहार करते हैं: 15 दिन में 1 बार मटन या बकरी या मुर्गी। अंडे या केवल उबले हुए मछली लें। सूप - धनिया, जीरे, साजूक घी की तड़क लगाकर।

रोग पर उपाय

भाग 2

श्वसन रोगों के कारण एवं उपचार

कारण (बाहरी कारक)

  • धूल, धुँआ के संपर्क में आना
  • अत्यधिक बोलना, क्रोध
  • वातावरण में बदल
  • रात को जागरण, दिन में सोना
  • पानी में डुबकी लगाना
  • सुबह के समय ठंडी हवा में घूमना
  • तकिए के बिना या ऊँचा तकिया लेकर सोना
  • हमेशा एक करवट सोना
  • पेट के बल सोना
  • खुली खिड़की पर मुँह खोलकर सोना
  • सुबह ठंडे पानी में काम करना
  • ठंडा पानी पीना
  • व्यायाम न करना

कारण (आहार संबंधी)

  • आहार में भारी, मीठा, खट्टा, नमकीन, ठंडा, सूखा, पचने में भारी, कफ बढ़ाने वाला आहार
  • पीसे हुए (पिसाई के), अभिष्यंदी (कफ बढ़ाने वाले), विदाही (जलन पैदा करने वाले), विरुद्ध (असंगत) पदार्थों का सेवन
  • मैदे के पदार्थ, बिस्कुट, टोस्ट, नमकीन, उड़द के पदार्थ, इडली, वड़ा, डोसा, चावल के पदार्थ (भात), दूध के पदार्थ (दूध, दही, छाछ, खीर, पनीर), चीनी, गुड़ के पदार्थ
  • फल: भिंडी, खीरा, कच्चा आम, संतरा, मौसंबी, अनानास, केला, नारियल, सेब, सीताफल
  • अपच होने पर या पचने में भारी होने वाले पदार्थों का सेवन
  • भोजन के तुरंत बाद स्नान करना या सोना
  • खाने के बाद, सुबह उठने पर, रात को सोते समय, अधिक पानी पीना
  • अत्यधिक व्यायाम, अत्यधिक संभोग
  • मूत्र-शौच का आभास होने पर तुरंत न जाना
  • अन्न न पचना, एसिडिटी, गैस बनना, पेट साफ न होना

उपरोक्त सभी कारणों से दमा बढ़ता है, इसलिए उपरोक्त सभी बातों से बचाव करें।

उपचार (आहार एवं जीवनशैली)

उपचार (आयुर्वेदिक पद्धति)

दमा, पुरानी सर्दी, खाँसी केवल आहार में बदलाव से होने वाले रोग नहीं हैं बल्कि वातावरण में बदलाव से भी होते हैं, इसलिए इनका उपचार 3 पद्धतियों से किया जाता है।

अनुशंसित सब्जियाँ एवं खाद्य पदार्थ

आवश्यक सामग्री:

सम्पर्क जानकारी

संपर्क एवं सूचना

डॉ. रमित कुमार

  • विशेषज्ञता: आयुर्वेदिक श्वसन रोग विशेषज्ञ
  • सम्पर्क सूत्र: 8979413938
  • परामर्श समय: प्रातः 9:00 - सायं 7:00
  • विशेषज्ञता क्षेत्र: पुरानी सर्दी, खाँसी, दमा, श्वसन संबंधी रोग
परामर्श के लिए कॉल करें: 8979413938

महत्वपूर्ण नोट: उपरोक्त सभी निर्देश आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार हैं। किसी भी उपचार को आरम्भ करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत की गई है।

श्वसन रोग एक जटिल स्वास्थ्य समस्या है जिसमें उचित आहार-विहार, नियमित उपचार और जीवनशैली में परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. रमित कुमार की विशेष सलाह

श्वसन रोगों में नियमित प्राणायाम और सही आहार विशेष महत्व रखते हैं। धूम्रपान और धूल-धुएँ के संपर्क से बचें। मौसम परिवर्तन के समय विशेष सावधानी बरतें।